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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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जनमेजय़ उवाच
कथं प्रवृत्तिधर्मेषु भागार्हा देवताः कृताः |  ३   क
कथं निवृत्तिधर्माश्च कृता व्यावृत्तवुद्धय़ः ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति