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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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वैशम्पाय़न उवाच
एष व्रह्मा लोकगुरुः सर्वलोकपितामहः |  ४६   क
यूय़ं च विवुधश्रेष्ठा मां यजध्वं समाहिताः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति