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शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो वै द्वापरं नाम मिश्रः कालो भविष्यति |  ७५   क
द्विपादहीनो धर्मश्च युगे तस्मिन्भविष्यति ||  ७५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति