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शान्ति पर्व
अध्याय २९
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वैशम्पाय़न उवाच
एकच्छत्रा मही यस्य प्रणता ह्यभवत्पुरा |  १२४   क
योऽश्वमेधसहस्रेण तर्पय़ामास देवताः ||  १२४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति