सौप्तिक पर्व  अध्याय १२

वैशम्पाय़न उवाच

त्वत्तोऽहं दुर्लभं काममनवाप्यैव केशव |  ३७   क
प्रतिय़ास्यामि गोविन्द शिवेनाभिवदस्व माम् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति