menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय ११७
chevron_left
chevron_right
भीष्म उवाच
ततो मुनिजनद्वेषाद्दुष्टात्मा श्वाकृतोऽवुधः |  ४४   क
ऋषिणा शरभः शप्तः स्वं रूपं पुनराप्तवान् ||  ४४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति