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शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
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भीष्म उवाच
मित्रामात्यं पुरं राष्ट्रं दण्डः कोशो महीपतिः |  १५४   क
सप्ताङ्गश्चक्रसङ्घातो राज्यमित्युच्यते नृप ||  १५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति