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शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
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श्रीभगवानु उवाच
स शापादृषिमुख्यस्य दीर्घं तम उपेय़िवान् |  ४८   क
स हि दीर्घतमा नाम नाम्ना ह्यासीदृषिः पुरा ||  ४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति