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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
नाराय़णाद्वरं लव्ध्वा प्राप्य योगमनुत्तमम् |  ३८   क
क्रमं प्रणीय़ शिक्षां च प्रणय़ित्वा स गालवः ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति