शल्य पर्व  अध्याय ५

दुर्योधन उवाच

अभिषिच्यस्व राजेन्द्र देवानामिव पावकिः |  २७   क
जहि शत्रून्रणे वीर महेन्द्रो दानवानिव ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति