शान्ति पर्व  अध्याय १३६

भीष्म उवाच

अमात्यो मे भव प्राज्ञ पितेव हि प्रशाधि माम् |  १२६   क
न तेऽस्ति भय़मस्मत्तो जीवितेनात्मनः शपे ||  १२६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति