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शान्ति पर्व
अध्याय ३२९
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श्रीभगवानु उवाच
सा विश्वस्य जननीत्येवमस्यार्थोऽनुभाष्यते ||  ४   क
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति