आदि पर्व  अध्याय ३३

सूत उवाच

सम्यक्सद्धर्ममूला हि व्यसने शान्तिरुत्तमा |  २०   क
अधर्मोत्तरता नाम कृत्स्नं व्यापादय़ेज्जगत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति