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अनुशासन पर्व
अध्याय ३३
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भीष्म उवाच
व्राह्मणा यं प्रशंसन्ति पुरुषः स प्रवर्धते |  १८   क
व्राह्मणैर्यः पराक्रुष्टः पराभूय़ात्क्षणाद्धि सः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति