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शल्य पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
पातय़ित्वा वय़स्यांश्च भ्रातॄनथ पितामहान् |  ४३   क
जीवितं यदि रक्षेय़ं लोको मां गर्हय़ेद्ध्रुवम् ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति