आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ३३

वैशम्पाय़न उवाच

स योगवलमास्थाय़ विवेश नृपतेस्तनुम् |  २६   क
विदुरो धर्मराजस्य तेजसा प्रज्वलन्निव ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति