वन पर्व  अध्याय २०६

व्याध उवाच

अजानता मय़ाकार्यमिदमद्य कृतं मुने |  २   क
क्षन्तुमर्हसि तत्सर्वं प्रसीद भगवन्निति ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति