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सभा पर्व
अध्याय ३३
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वैशम्पाय़न उवाच
ततो भीष्मः शान्तनवो वुद्ध्या निश्चित्य भारत |  २७   क
वार्ष्णेय़ं मन्यते कृष्णमर्हणीय़तमं भुवि ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति