वन पर्व  अध्याय ३३

द्रौपद्यु उवाच

आर्ताहं प्रलपामीदमिति मां विद्धि भारत |  २   क
भूय़श्च विलपिष्यामि सुमनास्तन्निवोध मे ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति