वन पर्व  अध्याय ३३

द्रौपद्यु उवाच

स मां राजन्कर्मवतीमागतामाह सान्त्वय़न् |  ५८   क
शुश्रूषमाणामासीनां पितुरङ्के युधिष्ठिर ||  ५८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति