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विराट पर्व
अध्याय ३३
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वैशम्पाय़न उवाच
श्वेता रजतसङ्काशा रथे युज्यन्तु ते हय़ाः |  १७   क
ध्वजं च सिंहं सौवर्णमुच्छ्रय़न्तु तवाभिभोः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति