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उद्योग पर्व
अध्याय ३३
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विदुर उवाच
क्रोधो हर्षश्च दर्पश्च ह्रीस्तम्भो मान्यमानिता |  १७   क
यमर्थान्नापकर्षन्ति स वै पण्डित उच्यते ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति