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उद्योग पर्व
अध्याय ३३
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विदुर उवाच
पञ्चेन्द्रिय़स्य मर्त्यस्य छिद्रं चेदेकमिन्द्रिय़म् |  ६५   क
ततोऽस्य स्रवति प्रज्ञा दृतेः पादादिवोदकम् ||  ६५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति