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उद्योग पर्व
अध्याय ३३
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विदुर उवाच
न स्वे सुखे वै कुरुते प्रहर्षं; नान्यस्य दुःखे भवति प्रतीतः |  ९४   क
दत्त्वा न पश्चात्कुरुतेऽनुतापं; न कत्थते सत्पुरुषार्यशीलः ||  ९४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति