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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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अर्जुन उवाच
अनेकवाहूदरवक्त्रनेत्रं; पश्यामि त्वा सर्वतोऽनन्तरूपम् |  १६   क
नान्तं न मध्यं न पुनस्तवादिं; पश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति