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द्रोण पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
युगान्ते चान्तको राजञ्जामदग्न्यश्च वीर्यवान् |  ४   क
रणस्थो भीमसेनश्च कथ्यन्ते सदृशास्त्रय़ः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति