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कर्ण पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
जनमेजय़श्च पाञ्चाल्यः कर्णं विव्याध साय़कैः |  २३   क
वराहकर्णैर्नाराचैर्नालीकैर्निशितैः शरैः |  २३   ख
वत्सदन्तैर्विपाठैश्च क्षुरप्रैश्चटकामुखैः ||  २३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति