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कर्ण पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
स पाण्डवानां प्रवरैः सर्वतः समभिद्रुतः |  २५   क
उदैरय़द्व्राह्ममस्त्रं शरैः सम्पूरय़न्दिशः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति