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शल्य पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
प्रत्यभ्यर्च्य हली सर्वान्क्षत्रिय़ांश्च महामनाः |  १२   क
कृत्वा कुशलसंय़ुक्तां संविदं च यथावय़ः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति