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शल्य पर्व
अध्याय ३३
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सञ्जय़ उवाच
स वभौ राजमध्यस्थो नीलवासाः सितप्रभः |  १७   क
दिवीव नक्षत्रगणैः परिकीर्णो निशाकरः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति