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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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उशनो उवाच
मूर्धा यस्य त्वनन्तं च स्थानं दानवसत्तम |  २   क
तस्याहं ते प्रवक्ष्यामि विष्णोर्माहात्म्यमुत्तमम् ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति