शान्ति पर्व  अध्याय ३३०

श्रीभगवानु उवाच

नोक्तपूर्वं मय़ा क्षुद्रमश्लीलं वा कदाचन |  १०   क
ऋता व्रह्मसुता सा मे सत्या देवी सरस्वती ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति