शान्ति पर्व  अध्याय ३३०

श्रीभगवानु उवाच

कृषामि मेदिनीं पार्थ भूत्वा कार्ष्णाय़सो महान् |  १४   क
कृष्णो वर्णश्च मे यस्मात्तस्मात्कृष्णोऽहमर्जुन ||  १४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति