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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
वोधनात्तापनाच्चैव जगतो हर्षणं भवेत् |  २   क
अग्नीषोमकृतैरेभिः कर्मभिः पाण्डुनन्दन |  २   ख
हृषीकेशोऽहमीशानो वरदो लोकभावनः ||  २   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति