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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
तथैवासं त्रिककुदो वाराहं रूपमास्थितः |  २८   क
त्रिककुत्तेन विख्यातः शरीरस्य तु मापनात् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति