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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
विरिञ्च इति यः प्रोक्तः कपिलज्ञानचिन्तकैः |  २९   क
स प्रजापतिरेवाहं चेतनात्सर्वलोककृत् ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति