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आदि पर्व
अध्याय ३
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सूत उवाच
स उपाध्याय़ेन सन्दिष्ट आरुणिः पाञ्चाल्यस्तत्र गत्वा तत्केदारखण्डं वद्धुं नाशक्नोत् ||  २१   क
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति