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शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
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श्रीभगवानु उवाच
ततः स्वतेजसाविष्टाः केशा नाराय़णस्य ह |  ४५   क
वभूवुर्मुञ्जवर्णास्तु ततोऽहं मुञ्जकेशवान् ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति