शान्ति पर्व  अध्याय ३३०

श्रीभगवानु उवाच

यास्को मामृषिरव्यग्रो नैकय़ज्ञेषु गीतवान् |  ७   क
शिपिविष्ट इति ह्यस्माद्गुह्यनामधरो ह्यहम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति