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शान्ति पर्व
अध्याय २३५
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व्यास उवाच
षट्कर्मा वर्तय़त्येकस्त्रिभिरन्यः प्रवर्तते |  ४   क
द्वाभ्यामेकश्चतुर्थस्तु व्रह्मसत्रे व्यवस्थितः |  ४   ख
गृहमेधिव्रतान्यत्र महान्तीह प्रचक्षते ||  ४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति