वन पर्व  अध्याय २७१

मार्कण्डेय़ उवाच

ततोऽभिपत्य वेगेन कुम्भकर्णं महामनाः |  ७   क
शालेन जघ्निवान्मूर्ध्नि वलेन कपिकुञ्जरः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति