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शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
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नारद उवाच
दृष्टो मे पुरुषः श्रीमान्विश्वरूपधरोऽव्ययः |  ३६   क
सर्वे हि लोकास्तत्रस्थास्तथा देवाः सहर्षिभिः |  ३६   ख
अद्यापि चैनं पश्यामि युवां पश्यन्सनातनौ ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति