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शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
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नारद उवाच
रमते सोऽर्च्यमानो हि सदा भागवतप्रिय़ः |  ४३   क
विश्वभुक्सर्वगो देवो वान्धवो भक्तवत्सलः |  ४३   ख
स कर्ता कारणं चैव कार्यं चातिवलद्युतिः ||  ४३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति