शान्ति पर्व  अध्याय ३३१

नारद उवाच

न तत्र सूर्यस्तपति न सोमोऽभिविराजते |  ४६   क
न वाय़ुर्वाति देवेशे तपश्चरति दुश्चरम् ||  ४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति