अनुशासन पर्व  अध्याय ७०

नाचिकेत उवाच

एवमादीनि मे तत्र धर्मराजो न्यदर्शय़त् |  ४१   क
दृष्ट्वा च परमं हर्षमवापमहमच्युत ||  ४१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति