शान्ति पर्व  अध्याय ३३५

व्यास उवाच

ददृशेऽद्भुतसङ्काशे लोकानापोमय़ान्प्रभुः |  २०   क
सत्त्वस्थः परमेष्ठी स ततो भूतगणान्सृजत् ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति