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शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
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व्यास उवाच
मम वेदा हृताः सर्वे दानवाभ्यां वलादितः |  ३०   क
अन्धकारा हि मे लोका जाता वेदैर्विनाकृताः |  ३०   ख
वेदानृते हि किं कुर्यां लोकान्वै स्रष्टुमुद्यतः ||  ३०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति