शान्ति पर्व  अध्याय ३३५

व्यास उवाच

नमस्ते व्रह्महृदय़ नमस्ते मम पूर्वज |  ३४   क
लोकाद्य भुवनश्रेष्ठ साङ्ख्ययोगनिधे विभो ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति