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शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
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व्यास उवाच
निष्कल्मषेण सत्त्वेन सम्पन्नं रुचिरप्रभम् |  ५९   क
तं दृष्ट्वा दानवेन्द्रौ तौ महाहासममुञ्चताम् ||  ५९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति