शान्ति पर्व  अध्याय ३३५

व्यास उवाच

रजस्तमोविष्टतनू तावुभौ मधुकैटभौ |  ६४   क
व्रह्मणोपचितिं कुर्वञ्जघान मधुसूदनः ||  ६४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति