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शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
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व्यास उवाच
अपां चैव गुणो राजन्रसो नाराय़णात्मकः |  ७८   क
ज्योतिषां च गुणो रूपं स्मृतं नाराय़णात्मकम् ||  ७८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति